अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनहु उमा ते लोग अभागी। हरि तजि होहिं बिषय अनुरागी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[शिवजी कहते हैं—] हे पार्वती! सुनो, वे लोग अभागे हैं जो भगवान्को छोड़कर विषयोंसे अनुराग करते हैं। फिर दोनों भाई सीताजीको खोजते हुए आगे चले। वे वनकी सघनता देखते जाते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 665 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनहु उमा ते लोग अभागी। हरि तजि होहिं बिषय अनुरागी।।
पुनि सीतहि खोजत द्वौ भाई। चले बिलोकत बन बहुताई।।
स्रोत अभिलेख 3.33 · पुस्तक पृ. 665, 665
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनहु उमा ते लोग अभागी। हरि तजि होहिं बिषय अनुरागी।।
English explanation
Listen, Uma: unfortunate are those who abandon Hari and become attached to sensual pleasures.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनो | listen |
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| ते | वे | those |
| लोग | लोग | people |
| अभागी | दुर्भाग्यशाली | unfortunate |
| हरि | भगवान हरि; यहाँ राम | Lord Hari; here, Rama |
| तजि | छोड़कर | having abandoned |
| होहिं | होते हैं; बनते हैं | become |
| बिषय | इंद्रियों के विषय; सांसारिक सुख | objects of the senses; worldly pleasures |
| अनुरागी | आसक्त; अनुराग रखने वाले | attached; enamored |
2 पुनि सीतहि खोजत द्वौ भाई। चले बिलोकत बन बहुताई।।
English explanation
Then the two brothers, Rama and Lakshmana, went on searching for Sita, surveying the forest extensively.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then; again |
| सीतहि | सीता को | Sita, as the object of the search |
| खोजत | खोजते हुए | searching for |
| द्वौ | दोनों | both; the two |
| भाई | भाई राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
| चले | चल पड़े; आगे बढ़े | went on; proceeded |
| बिलोकत | देखते हुए; निरीक्षण करते हुए | looking about; surveying |
| बन | वन | forest |
| बहुताई | बहुत विस्तार से; दूर-दूर तक | extensively; far and wide |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.33
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 665
- सहायक विषय
- कबन्ध-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 665, 665
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।