अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कोमल चित अति दीनदयाला। कारन बिनु रघुनाथ कृपाला।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरघुनाथजी अत्यन्त कोमल चित्तवाले, दीनदयालु और बिना ही कारण कृपालु हैं। गीध [पक्षियोंमें भी] अधम पक्षी और मांसाहारी था, उसको भी वह दुर्लभ गति दी, जिसे योगीजन माँगते रहते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 665 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कोमल चित अति दीनदयाला। कारन बिनु रघुनाथ कृपाला।।
गीध अधम खग आमिष भोगी। गति दीन्हि जो जाचत जोगी।।
स्रोत अभिलेख 3.33 · पुस्तक पृ. 665, 665
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कोमल चित अति दीनदयाला। कारन बिनु रघुनाथ कृपाला।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Rama is tender-hearted, deeply compassionate toward the lowly, and gracious without requiring any reason or return.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोमल | कोमल | tender |
| चित | हृदय; मन | heart; mind |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| दीनदयाला | दीनों पर दया करने वाले | compassionate toward the lowly |
| कारन | कारण; कृपा का कोई हेतु | reason; grounds for grace |
| बिनु | बिना | without |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| कृपाला | कृपा करने वाले | gracious; merciful |
2 गीध अधम खग आमिष भोगी। गति दीन्हि जो जाचत जोगी।।
English explanation
To Jatayu, the vulture described as a lowly, flesh-eating bird, he granted the supreme spiritual destination that yogis seek.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गीध | गिद्ध जटायु | Jatayu, the vulture |
| अधम | नीच माना गया; अधम | regarded as lowly |
| खग | पक्षी | bird |
| आमिष | मांस | flesh; meat |
| भोगी | खाने वाला | one who consumes |
| गति | परम गति; मुक्ति | supreme spiritual destination; liberation |
| दीन्हि | दी; प्रदान की | granted |
| जो | जिसे | which |
| जाचत | माँगते हैं | seek; ask for |
| जोगी | योगी | yogic ascetics |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.33
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 665
- सहायक विषय
- कबन्ध-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 665, 665
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।