अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनत सभासद उठे अकुलाई। समुझाई गहि बाहँ उठाई।।
मूल पाठ
सुनत सभासद उठे अकुलाई। समुझाई गहि बाहँ उठाई।।
कह लंकेस कहसि निज बाता। केंइँ तव नासा कान निपाता।।
स्रोत अभिलेख 3.22 · पुस्तक पृ. 650, 651
भावार्थ
मूल पाठ के बादशूर्पणखाके वचन सुनते ही सभासद् अकुला उठे। उन्होंने शूर्पणखाकी बाँह पकड़कर उसे उठाया और समझाया। लङ्कापति रावणने कहा—अपनी बात तो बता, किसने तेरे नाक-कान काट लिये?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 650 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनत सभासद उठे अकुलाई। समुझाई गहि बाहँ उठाई।।
English explanation
AI draft: On hearing her, the courtiers rose in distress. They consoled her, took her by the arm, and helped her up.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| सभासद | सभा के सदस्य | courtiers |
| उठे | उठ खड़े हुए | rose |
| अकुलाई | व्याकुल होकर | in distress |
| समुझाई | समझाकर, ढाढ़स देकर | having consoled her |
| गहि | पकड़कर | having grasped |
| बाहँ | बाँह | her arm |
| उठाई | उठाया | helped her up |
2 कह लंकेस कहसि निज बाता। केंइँ तव नासा कान निपाता।।
English explanation
Ravana, king of Lanka, said, “Tell me your story. Who cut off your nose and ears?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| लंकेस | लंका के राजा रावण | Ravana, king of Lanka |
| कहसि | तुम कहो | tell me |
| निज | अपनी | your own |
| बाता | बात, वृत्तांत | account |
| केंइँ | किसने | by whom |
| तव | तुम्हारी | your |
| नासा | नाक | nose |
| कान | कान | ears |
| निपाता | काट डाले | cut off |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 650
- सहायक विषय
- शूर्पणखाका रावणके निकट जाना, श्रीसीताजीका अग्रि-प्रवेश और माया-सीता
- मुद्रित पृष्ठ
- 650, 651
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।