अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुंदरि सुनु मैं उन्ह कर दासा। पराधीन नहिं तोर सुपासा।।
मूल पाठ
सुंदरि सुनु मैं उन्ह कर दासा। पराधीन नहिं तोर सुपासा।।
प्रभु समर्थ कोसलपुर राजा। जो कछु करहिं उनहि सब छाजा।।
स्रोत अभिलेख 3.17 · पुस्तक पृ. 641, 643
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे सुन्दरी! सुन, मैं तो उनका दास हूँ। मैं पराधीन हूँ, अत: तुम्हें सुभीता (सुख) न होगा। प्रभु समर्थ हैं, कोसलपुरके राजा हैं, वे जो कुछ करें, उन्हें सब फबता है॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 642 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुंदरि सुनु मैं उन्ह कर दासा। पराधीन नहिं तोर सुपासा।।
English explanation
Listen, beautiful lady: I am his servant and dependent on him, so I am not a suitable, comfortable match for you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुंदरि | हे सुंदरी | O beautiful lady |
| सुनु | सुनो | listen |
| मैं | मैं | I |
| उन्ह | उन राम | him, Rama |
| कर | का | of |
| दासा | सेवक | servant |
| पराधीन | दूसरे के अधीन | dependent on another |
| नहिं | नहीं | not |
| तोर | तुम्हारे लिए | for you |
| सुपासा | सुखद अनुकूल साथी | a suitable, comfortable match |
2 प्रभु समर्थ कोसलपुर राजा। जो कछु करहिं उनहि सब छाजा।।
English explanation
The Lord is powerful and king of Ayodhya; whatever he does befits him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| समर्थ | सक्षम, शक्तिशाली | capable and powerful |
| कोसलपुर | अयोध्या के | of Ayodhya |
| राजा | राजा | king |
| जो | जो | whatever |
| कछु | कुछ | anything |
| करहिं | करते हैं | he does |
| उनहि | उन्हें | him |
| सब | सब | all |
| छाजा | शोभा देता है | befits |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 642
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 641, 643
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