अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीता परम रुचिर मृग देखा। अंग अंग सुमनोहर बेषा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसीताजीने उस परम सुन्दर हिरनको देखा, जिसके अङ्ग-अङ्गकी छटा अत्यन्त मनोहर थी। [वे कहने लगीं—] हे देव! हे कृपालु रघुवीर! सुनिये। इस मृगकी छाल बहुत ही सुन्दर है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 655 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सीता परम रुचिर मृग देखा। अंग अंग सुमनोहर बेषा।।
सुनहु देव रघुबीर कृपाला। एहि मृग कर अति सुंदर छाला।।
स्रोत अभिलेख 3.27 · पुस्तक पृ. 655, 656
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सीता परम रुचिर मृग देखा। अंग अंग सुमनोहर बेषा।।
English explanation
Sita saw the exceedingly beautiful deer, whose every limb had a most captivating appearance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीता | राम की पत्नी सीता ने | Sita, Rama’s wife |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| रुचिर | सुंदर | beautiful |
| मृग | हिरण | deer |
| देखा | देखा | saw |
| अंग | अंग | limb |
| अंग | प्रत्येक अंग | every limb |
| सुमनोहर | बहुत मनोहर | most captivating |
| बेषा | रूप; दिखावट | appearance |
2 सुनहु देव रघुबीर कृपाला। एहि मृग कर अति सुंदर छाला।।
English explanation
Listen, my lord, compassionate hero of Raghu’s line! This deer’s hide is exceedingly beautiful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनिए | listen |
| देव | हे स्वामी | my lord |
| रघुबीर | हे रघुकुल के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s line |
| कृपाला | हे कृपालु | compassionate one |
| एहि | इस | this |
| मृग | हिरण | deer |
| कर | की | of |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| छाला | खाल | hide |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 655
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 655, 656
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।