अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेहि बन निकट दसानन गयऊ। तब मारीच कपटमृग भयऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजब रावण उस वनके (जिस वनमें श्रीरघुनाथजी रहते थे) निकट पहुँचा, तब मारीच कपटमृग बन गया। वह अत्यन्त ही विचित्र था, कुछ वर्णन नहीं किया जा सकता। सोनेका शरीर मणियोंसे जड़कर बनाया था॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 655 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तेहि बन निकट दसानन गयऊ। तब मारीच कपटमृग भयऊ।।
अति बिचित्र कछु बरनि न जाई। कनक देह मनि रचित बनाई।।
स्रोत अभिलेख 3.27 · पुस्तक पृ. 655, 656
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तेहि बन निकट दसानन गयऊ। तब मारीच कपटमृग भयऊ।।
English explanation
Ravana went near that forest. Then Maricha assumed the deceptive form of a deer.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस | that |
| बन | वन | forest |
| निकट | पास | near |
| दसानन | दस सिरों वाला रावण | Ravana, the ten-headed king |
| गयऊ | गया | went |
| तब | तब | then |
| मारीच | राक्षस मारीच | the demon Maricha |
| कपटमृग | छल से बना मृग | a deceptive deer-form |
| भयऊ | बन गया | became |
2 अति बिचित्र कछु बरनि न जाई। कनक देह मनि रचित बनाई।।
English explanation
It was so extraordinary that it could not be described. He fashioned a golden body adorned with gems.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | extremely |
| बिचित्र | अनोखा | extraordinary |
| कछु | कुछ भी | anything of it |
| बरनि | वर्णन किया | described |
| न | नहीं | not |
| जाई | जा सकता | can be |
| कनक | सोना; सोने की | gold; golden |
| देह | देह | body |
| मनि | मणियों से | with gems |
| रचित | सजी हुई | adorned |
| बनाई | बनाई | fashioned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 655
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 655, 656
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।