अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सत्यसंध प्रभु बधि करि एही। आनहु चर्म कहति बैदेही।।
मूल पाठ
सत्यसंध प्रभु बधि करि एही। आनहु चर्म कहति बैदेही।।
तब रघुपति जानत सब कारन। उठे हरषि सुर काजु सँवारन।।
स्रोत अभिलेख 3.27 · पुस्तक पृ. 655, 656
भावार्थ
मूल पाठ के बादजानकीजीने कहा—हे सत्यप्रतिज्ञ प्रभो! इसको मारकर इसका चमड़ा ला दीजिये। तब श्रीरघुनाथजी [मारीचके कपटमृग बननेका] सब कारण जानते हुए भी, देवताओंका कार्य बनानेके लिये हॢषत होकर उठे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 655 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सत्यसंध प्रभु बधि करि एही। आनहु चर्म कहति बैदेही।।
English explanation
Sita says, ‘Lord, faithful to your word, kill this deer and bring its hide.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत्यसंध | हे सत्यप्रतिज्ञ | faithful to your word |
| प्रभु | हे स्वामी | Lord |
| बधि | वध | killing |
| करि | करके | having done |
| एही | इसी को | this very one |
| आनहु | ले आइए | bring |
| चर्म | खाल | hide |
| कहति | कहती हैं | says |
| बैदेही | विदेह की राजकुमारी सीता | Sita, princess of Videha |
2 तब रघुपति जानत सब कारन। उठे हरषि सुर काजु सँवारन।।
English explanation
Then Rama, knowing all the reasons, rose joyfully to accomplish the gods’ purpose.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
| जानत | जानते हुए | knowing |
| सब | सभी | all |
| कारन | कारण | reasons |
| उठे | उठे | rose |
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| सुर | देवताओं का | the gods’ |
| काजु | कार्य | purpose |
| सँवारन | सिद्ध करने के लिए | to accomplish |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 655
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 655, 656
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।