अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मृग बिलोकि कटि परिकर बाँधा। करतल चाप रुचिर सर साँधा।।
मूल पाठ
मृग बिलोकि कटि परिकर बाँधा। करतल चाप रुचिर सर साँधा।।
प्रभु लछिमनिहि कहा समुझाई। फिरत बिपिन निसिचर बहु भाई।।
स्रोत अभिलेख 3.27 · पुस्तक पृ. 655, 656
भावार्थ
मूल पाठ के बादहिरनको देखकर श्रीरामजीने कमरमें फेंटा बाँधा और हाथमें धनुष लेकर उसपर सुन्दर (दिव्य) बाण चढ़ाया। फिर प्रभुने लक्ष्मणजीको समझाकर कहा—हे भाई! वनमें बहुत-से राक्षस फिरते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 655 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मृग बिलोकि कटि परिकर बाँधा। करतल चाप रुचिर सर साँधा।।
English explanation
Seeing the deer, Rama fastened his waist-sash, took the bow in hand, and readied a fine arrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मृग | हिरण को | the deer |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| कटि | कमर पर | at the waist |
| परिकर | फेंटा; कमरबंध | waist-sash |
| बाँधा | बाँधा | fastened |
| करतल | हाथ में | in hand |
| चाप | धनुष | bow |
| रुचिर | सुंदर | fine |
| सर | बाण | arrow |
| साँधा | साधा; चलाने को तैयार किया | readied to shoot |
2 प्रभु लछिमनिहि कहा समुझाई। फिरत बिपिन निसिचर बहु भाई।।
English explanation
The Lord instructed Lakshmana, saying, ‘Brother, many demons roam the forest.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| लछिमनिहि | लक्ष्मण को | to Lakshmana |
| कहा | कहा | said |
| समुझाई | समझाकर | instructing |
| फिरत | घूमते हैं | roam |
| बिपिन | वन में | in the forest |
| निसिचर | राक्षस | demons |
| बहु | बहुत से | many |
| भाई | हे भाई | brother |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 655
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 655, 656
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।