अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीता केरि करेहु रखवारी। बुधि बिबेक बल समय बिचारी।।
मूल पाठ
सीता केरि करेहु रखवारी। बुधि बिबेक बल समय बिचारी।।
प्रभुहि बिलोकि चला मृग भाजी। धाए रामु सरासन साजी।।
स्रोत अभिलेख 3.27 · पुस्तक पृ. 655, 656
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुम बुद्धि और विवेकके द्वारा बल और समयका विचार करके सीताकी रखवाली करना। प्रभुको देखकर मृग भाग चला। श्रीरामचन्द्रजी भी धनुष चढ़ाकर उसके पीछे दौड़े॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 655 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सीता केरि करेहु रखवारी। बुधि बिबेक बल समय बिचारी।।
English explanation
Guard Sita, taking account of your intelligence, discernment, strength, and the circumstances.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीता | सीता | Sita |
| केरि | की | of |
| करेहु | करना | perform |
| रखवारी | रक्षा; पहरेदारी | guarding |
| बुधि | बुद्धि | intelligence |
| बिबेक | विवेक | discernment |
| बल | शक्ति | strength |
| समय | समय; परिस्थिति | time and circumstances |
| बिचारी | विचार करके | having considered |
2 प्रभुहि बिलोकि चला मृग भाजी। धाए रामु सरासन साजी।।
English explanation
Seeing the Lord, the deer fled. Rama ran after it with his bow ready.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभुहि | प्रभु राम को | Lord Rama |
| बिलोकि | देखकर | seeing |
| चला | चल पड़ा | went off |
| मृग | हिरण | the deer |
| भाजी | भागकर | fleeing |
| धाए | दौड़े | ran |
| रामु | राम | Rama |
| सरासन | धनुष | bow |
| साजी | तैयार करके | having readied |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 655
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 655, 656
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।