अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीता चितव स्याम मृदु गाता। परम प्रेम लोचन न अघाता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसीताजी श्रीरामजीके श्याम और कोमल शरीरको परम प्रेमके साथ देख रही हैं, नेत्र अघाते नहीं हैं। इस प्रकार पञ्चवटीमें बसकर श्रीरघुनाथजी देवताओं और मुनियोंको सुख देनेवाले चरित्र करने लगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 649 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सीता चितव स्याम मृदु गाता। परम प्रेम लोचन न अघाता।।
पंचवटीं बसि श्रीरघुनायक। करत चरित सुर मुनि सुखदायक।।
स्रोत अभिलेख 3.21 · पुस्तक पृ. 649, 650
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सीता चितव स्याम मृदु गाता। परम प्रेम लोचन न अघाता।।
English explanation
Sita gazes at Rama’s dark, tender form; in her deep love, her eyes cannot have their fill.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीता | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| चितव | निहारती हैं | gazes at |
| स्याम | साँवला | dark-hued |
| मृदु | कोमल | tender |
| गाता | शरीर | body |
| परम | अत्यंत | supreme; deep |
| प्रेम | प्रेम से | with love |
| लोचन | नेत्र | eyes |
| न | नहीं | not |
| अघाता | तृप्त होते | have their fill |
2 पंचवटीं बसि श्रीरघुनायक। करत चरित सुर मुनि सुखदायक।।
English explanation
Dwelling in Panchavati, Rama performs deeds that bring joy to gods and sages.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पंचवटीं | पंचवटी में | in Panchavati |
| बसि | रहकर | dwelling |
| श्रीरघुनायक | श्रीराम, रघुकुल के नायक | Rama, leader of the Raghu lineage |
| करत | करते हैं | performs |
| चरित | चरित, कार्य | deeds |
| सुर | देवताओं को | to gods |
| मुनि | मुनियों को | to sages |
| सुखदायक | सुख देने वाले | bringing joy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 649
- सहायक विषय
- शूर्पणखाका रावणके निकट जाना, श्रीसीताजीका अग्रि-प्रवेश और माया-सीता
- मुद्रित पृष्ठ
- 649, 650
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।