अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धुआँ देखि खरदूषन केरा। जाइ सुपनखाँ रावन प्रेरा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दखर-दूषणका विध्वंस देखकर शूर्पणखाने जाकर रावणको भड़काया। वह बड़ा क्रोध करके वचन बोली—तूने देश और खजानेकी सुधि ही भुला दी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 649 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
धुआँ देखि खरदूषन केरा। जाइ सुपनखाँ रावन प्रेरा।।
बोलि बचन क्रोध करि भारी। देस कोस कै सुरति बिसारी।।
स्रोत अभिलेख 3.21 · पुस्तक पृ. 649, 650
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 धुआँ देखि खरदूषन केरा। जाइ सुपनखाँ रावन प्रेरा।।
English explanation
Seeing the smoke associated with Khara and Dushana, Shurpanakha went and incited Ravana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धुआँ | धुआँ | smoke |
| देखि | देखकर | seeing |
| खरदूषन | खर और दूषण, राक्षस भाई | Khara and Dushana, demon brothers |
| केरा | का | of |
| जाइ | जाकर | going |
| सुपनखाँ | शूर्पणखा, रावण की बहन | Shurpanakha, Ravana’s sister |
| रावन | रावण को | Ravana |
| प्रेरा | उकसाया | incited |
2 बोलि बचन क्रोध करि भारी। देस कोस कै सुरति बिसारी।।
English explanation
In great anger she spoke: You have forgotten to attend to your realm and treasury.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोलि | बोलकर | speaking |
| बचन | वचन | words |
| क्रोध | क्रोध | anger |
| करि | करके | having felt |
| भारी | बहुत तीव्र | great |
| देस | देश, राज्य | realm |
| कोस | राजकोष | treasury |
| कै | की | of |
| सुरति | सुध, ध्यान | attention; care |
| बिसारी | भुला दी | forgotten |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 649
- सहायक विषय
- शूर्पणखाका रावणके निकट जाना, श्रीसीताजीका अग्रि-प्रवेश और माया-सीता
- मुद्रित पृष्ठ
- 649, 650
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।