अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करसि पान सोवसि दिनु राती। सुधि नहिं तव सिर पर आराती।।
मूल पाठ
करसि पान सोवसि दिनु राती। सुधि नहिं तव सिर पर आराती।।
राज नीति बिनु धन बिनु धर्मा। हरिहि समर्पे बिनु सतकर्मा।।
बिद्या बिनु बिबेक उपजाएँ। श्रम फल पढ़े किएँ अरु पाएँ।।
संग ते जती कुमंत्र ते राजा। मान ते ग्यान पान तें लाजा।।
स्रोत अभिलेख 3.21 · पुस्तक पृ. 649, 650
भावार्थ
मूल पाठ के बादशराब पी लेता है और दिन-रात पड़ा सोता रहता है। तुझे खबर नहीं है कि शत्रु तेरे सिरपर खड़ा है? नीतिके बिना राज्य और धर्मके बिना धन प्राप्त करनेसे, भगवान्को समर्पण किये बिना उत्तम कर्म करनेसे और विवेक उत्पन्न किये बिना विद्या पढऩेसे परिणाममें श्रम ही हाथ लगता है। विषयोंके सङ्गसे संन्यासी, बुरी सलाहसे राजा, मानसे ज्ञान, मदिरापानसे लज्जा,॥ ४-५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 649 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 करसि पान सोवसि दिनु राती। सुधि नहिं तव सिर पर आराती।।
English explanation
You drink and sleep day and night, unaware that an enemy is looming over you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करसि | तुम करते हो | you do |
| पान | मदिरापान | drinking liquor |
| सोवसि | तुम सोते हो | you sleep |
| दिनु | दिन | day |
| राती | रात | night |
| सुधि | खबर | awareness |
| नहिं | नहीं | not |
| तव | तुम्हारे | your |
| सिर | सिर | head |
| पर | पर | over |
| आराती | शत्रु | enemy |
2 राज नीति बिनु धन बिनु धर्मा। हरिहि समर्पे बिनु सतकर्मा।।
English explanation
Rule without sound policy, religious duty without wealth, and good deeds without dedication to Hari are examples of the futility stated in the following line.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राज | राज्य, शासन | rule; kingdom |
| नीति | शासन की नीति | sound statecraft |
| बिनु | के बिना | without |
| धन | धन | wealth |
| बिनु | के बिना | without |
| धर्मा | धर्माचरण | religious duty |
| हरिहि | हरि को | to Hari, the Lord |
| समर्पे | समर्पित किए | having dedicated |
| बिनु | बिना | without |
| सतकर्मा | अच्छे कर्म | good deeds |
3 बिद्या बिनु बिबेक उपजाएँ। श्रम फल पढ़े किएँ अरु पाएँ।।
English explanation
Learning without developing discernment is likewise futile; studying, acting, and acquiring yield only toil.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिद्या | विद्या, शिक्षा | learning |
| बिनु | बिना | without |
| बिबेक | विवेक | discernment |
| उपजाएँ | उत्पन्न किए | developing |
| श्रम | केवल परिश्रम | mere toil |
| फल | फल, परिणाम | result |
| पढ़े | पढ़ने से | from studying |
| किएँ | कर्म करने से | from performing deeds |
| अरु | और | and |
| पाएँ | प्राप्त करने से | from acquiring |
4 संग ते जती कुमंत्र ते राजा। मान ते ग्यान पान तें लाजा।।
English explanation
Attachment ruins the ascetic, bad counsel the king, pride knowledge, and drinking modesty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संग | आसक्ति, विषय-संग | attachment; sensual association |
| ते | से | through |
| जती | संयमी, यति | ascetic |
| कुमंत्र | बुरी सलाह | bad counsel |
| ते | से | through |
| राजा | राजा | king |
| मान | अहंकार | pride |
| ते | से | through |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| पान | मदिरापान | drinking liquor |
| तें | से | through |
| लाजा | लज्जा, मर्यादा | modesty |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 649
- सहायक विषय
- शूर्पणखाका रावणके निकट जाना, श्रीसीताजीका अग्रि-प्रवेश और माया-सीता
- मुद्रित पृष्ठ
- 649, 650
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।