अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रीति प्रनय बिनु मद ते गुनी। नासहि बेगि नीति अस सुनी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दनम्रताके बिना (नम्रता न होनेसे) प्रीति और मद (अहङ्कार) से गुणवान् शीघ्र ही नष्ट हो जाते हैं, इस प्रकार नीति मैंने सुनी है॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 650 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रीति प्रनय बिनु मद ते गुनी। नासहि बेगि नीति अस सुनी।।
स्रोत अभिलेख 3.21 · पुस्तक पृ. 649, 650
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रीति प्रनय बिनु मद ते गुनी। नासहि बेगि नीति अस सुनी।।
English explanation
Love without affection, and a virtuous person through arrogance, soon perish; such is the maxim I have heard.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रीति | प्रेम | love |
| प्रनय | स्नेह, आत्मीय लगाव | affection; intimacy |
| बिनु | के बिना | without |
| मद | अहंकार | arrogance |
| ते | से | through |
| गुनी | गुणवान व्यक्ति | virtuous person |
| नासहि | नष्ट होते हैं | perish |
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| नीति | नीति-वचन | maxim of conduct |
| अस | ऐसी | such |
| सुनी | सुनी है | have heard |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 650
- सहायक विषय
- शूर्पणखाका रावणके निकट जाना, श्रीसीताजीका अग्रि-प्रवेश और माया-सीता
- मुद्रित पृष्ठ
- 649, 650
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।