अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जब रघुनाथ समर रिपु जीते। सुर नर मुनि सब के भय बीते।।
मूल पाठ
जब रघुनाथ समर रिपु जीते। सुर नर मुनि सब के भय बीते।।
तब लछिमन सीतहि लै आए। प्रभु पद परत हरषि उर लाए।
स्रोत अभिलेख 3.21 · पुस्तक पृ. 649, 650
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब श्रीरघुनाथजीने युद्धमें शत्रुओंको जीत लिया तथा देवता, मनुष्य और मुनि सबके भय नष्ट हो गये, तब लक्ष्मणजी सीताजीको ले आये। चरणोंमें पड़ते हुए उनको प्रभुने प्रसन्नतापूर्वक उठाकर हृदयसे लगा लिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 649 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जब रघुनाथ समर रिपु जीते। सुर नर मुनि सब के भय बीते।।
English explanation
AI draft: When Rama defeated the enemies in battle, the fears of gods, humans, and sages all passed away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| रघुनाथ | श्रीराम, रघुकुल के स्वामी | Rama, lord of the Raghu lineage |
| समर | युद्ध में | in battle |
| रिपु | शत्रुओं को | the enemies |
| जीते | जीत लिया | defeated |
| सुर | देवता | gods |
| नर | मनुष्य | humans |
| मुनि | मुनि | sages |
| सब | सभी | all |
| के | के | of |
| भय | भय | fears |
| बीते | दूर हो गए | passed away |
2 तब लछिमन सीतहि लै आए। प्रभु पद परत हरषि उर लाए।
English explanation
Then Lakshmana brought Sita. As Lakshmana bowed at the Lord’s feet, Rama joyfully embraced him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| लछिमन | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| सीतहि | सीता को | Sita |
| लै | लेकर | bringing |
| आए | आए | came |
| प्रभु | प्रभु राम के | Lord Rama’s |
| पद | चरणों में | at the feet |
| परत | गिरते हुए | as he bowed down |
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| उर | हृदय से | to his breast |
| लाए | लगा लिया | embraced |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 649
- सहायक विषय
- शूर्पणखाका रावणके निकट जाना, श्रीसीताजीका अग्रि-प्रवेश और माया-सीता
- मुद्रित पृष्ठ
- 649, 650
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।