अरण्यकाण्ड · दोहा 20 (ख) · दोहा
हरषित बरषहिं सुमन सुर बाजहिं गगन निसान।
हरषित बरषहिं सुमन सुर बाजहिं गगन निसान।
अस्तुति करि करि सब चले सोभित बिबिध बिमान॥ २० (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.2 · पुस्तक पृ. 646, 648
भावार्थ और शब्दार्थ
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1हरषित बरषहिं सुमन सुर बाजहिं गगन निसान।
प्रसन्न देवता फूल बरसाते हैं और आकाश में नगाड़े बजते हैं।
English explanation
The delighted gods shower flowers, and kettledrums resound in the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषित | प्रसन्न | delighted |
| बरषहिं | बरसाते हैं | shower |
| सुमन | फूल | flowers |
| सुर | देवता | the gods |
| बाजहिं | बजते हैं | resound |
| गगन | आकाश में | in the sky |
| निसान | नगाड़े | kettledrums |
2अस्तुति करि करि सब चले सोभित बिबिध बिमान॥ २० (ख)॥
बार-बार स्तुति करके सभी देवता चले गए, विविध विमानों में शोभायमान होकर।
English explanation
After repeatedly offering praise, all the gods departed, resplendent in their various celestial vehicles.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस्तुति | स्तुति | praise |
| करि | करके | having offered |
| करि | बार-बार करके | doing so repeatedly |
| सब | सभी देवता | all the gods |
| चले | चले गए | departed |
| सोभित | शोभायमान | resplendent |
| बिबिध | विविध प्रकार के | various |
| बिमान | दिव्य आकाशीय वाहनों में | in celestial vehicles |
| ख | पद्य-संदर्भ का चिह्न ‘ख’ | verse reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा 20 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 3.2
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 646, 648
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