अरण्यकाण्ड · दोहा 20 (क) · दोहा
राम राम कहि तनु तजहिं पावहिं पद निर्बान।
राम राम कहि तनु तजहिं पावहिं पद निर्बान।
करि उपाय रिपु मारे छन महुँ कृपानिधान॥ २० (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.2 · पुस्तक पृ. 646, 648
भावार्थ और शब्दार्थ
1राम राम कहि तनु तजहिं पावहिं पद निर्बान।
‘राम, राम’ कहकर वे शरीर त्यागते हैं और मुक्ति का पद प्राप्त करते हैं। (यह अर्थ-विवरण एआई का प्रारूप है।)
English explanation
Uttering ‘Rama, Rama,’ they leave their bodies and attain liberation. (This explanation is an AI draft.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम का नाम | the name of Lord Rama |
| राम | फिर से श्रीराम का नाम | Rama’s name repeated |
| कहि | कहकर | having uttered |
| तनु | शरीर | the body |
| तजहिं | त्यागते हैं | they relinquish |
| पावहिं | प्राप्त करते हैं | they attain |
| पद | अवस्था या परम स्थान | state or supreme abode |
| निर्बान | मुक्ति का | of liberation |
2करि उपाय रिपु मारे छन महुँ कृपानिधान॥ २० (क)॥
कृपा के भंडार श्रीराम ने उपाय करके क्षण भर में शत्रुओं को मार डाला।
English explanation
Rama, the treasure of compassion, used a stratagem and slew the enemies in a moment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having used |
| उपाय | युक्ति या उपाय | a stratagem |
| रिपु | शत्रुओं को | the enemies |
| मारे | मार डाला | slew |
| छन | क्षण | a moment |
| महुँ | में | in |
| कृपानिधान | कृपा के भंडार श्रीराम ने | Rama, the treasure of compassion |
| क | पद्य-संदर्भ का चिह्न ‘क’ | verse reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा 20 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 3.2
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 646, 648
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।