अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सावधान मानद मदहीना। धीर धर्म गति परम प्रबीना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसावधान, दूसरोंको मान देनेवाले, अभिमानरहित, धैर्यवान्, धर्मके ज्ञान और आचरणमें अत्यन्त निपुण,॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 678 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सावधान मानद मदहीना। धीर धर्म गति परम प्रबीना।।
स्रोत अभिलेख 3.45 · पुस्तक पृ. 677, 678
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सावधान मानद मदहीना। धीर धर्म गति परम प्रबीना।।
English explanation
They are vigilant, respectful toward others, free of pride, steadfast, and deeply versed in the ways of righteousness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सावधान | सजग | vigilant |
| मानद | दूसरों को सम्मान देने वाले | giving honor to others |
| मदहीना | अहंकाररहित | free of pride |
| धीर | धैर्यवान और स्थिर | patient and steadfast |
| धर्म | धर्म की | of righteousness |
| गति | रीति और मार्ग | ways and course |
| परम | अत्यंत | supremely |
| प्रबीना | निपुण | well versed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.45
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 678
- सहायक विषय
- नारद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 677, 678
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।