अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
षट बिकार जित अनघ अकामा। अचल अकिंचन सुचि सुखधामा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे संत [काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर—इन] छ: विकारों (दोषों) को जीते हुए, पापरहित, कामनारहित, निश्चल (स्थिरबुद्धि), अकिञ्चन (सर्वत्यागी), बाहर-भीतरसे पवित्र, सुखके धाम, असीम ज्ञानवान्, इच्छारहित, मिताहारी, सत्यनिष्ठ, कवि, विद्वान्, योगी,॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 678 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
षट बिकार जित अनघ अकामा। अचल अकिंचन सुचि सुखधामा।।
अमितबोध अनीह मितभोगी। सत्यसार कबि कोबिद जोगी।।
स्रोत अभिलेख 3.45 · पुस्तक पृ. 677, 678
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 षट बिकार जित अनघ अकामा। अचल अकिंचन सुचि सुखधामा।।
English explanation
Saints have conquered the six passions; they are sinless, desireless, steadfast, free of possessiveness, pure, and abodes of happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| षट | छह | six |
| बिकार | मन के विकार | inner passions |
| जित | जीते हुए | conquered |
| अनघ | निष्पाप | sinless |
| अकामा | कामनारहित | free of desires |
| अचल | स्थिर | steadfast |
| अकिंचन | संग्रह और स्वामित्व के मोह से रहित | without possessions or possessiveness |
| सुचि | पवित्र | pure |
| सुखधामा | सुख के धाम | abodes of happiness |
2 अमितबोध अनीह मितभोगी। सत्यसार कबि कोबिद जोगी।।
English explanation
Their understanding is boundless; they are without craving, moderate in enjoyment, grounded in truth, discerning, learned, and devoted to yoga.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अमितबोध | असीम बोध वाले | of boundless understanding |
| अनीह | इच्छारहित | without craving |
| मितभोगी | संयमित भोग करने वाले | moderate in enjoyment |
| सत्यसार | सत्य को सार मानने वाले | grounded in truth |
| कबि | विवेकशील ज्ञानी | discerning sages |
| कोबिद | विद्वान | learned |
| जोगी | योगी | practitioners of yoga |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.45
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 678
- सहायक विषय
- नारद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 677, 678
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।