अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संतन्ह के लच्छन रघुबीरा। कहहु नाथ भव भंजन भीरा।।
मूल पाठ
संतन्ह के लच्छन रघुबीरा। कहहु नाथ भव भंजन भीरा।।
सुनु मुनि संतन्ह के गुन कहऊँ। जिन्ह ते मैं उन्ह कें बस रहऊँ।।
स्रोत अभिलेख 3.45 · पुस्तक पृ. 677, 678
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे रघुवीर! हे भव-भय (जन्म-मरणके भय)-का नाश करनेवाले मेरे नाथ! अब कृपा कर संतोंके लक्षण कहिये। [श्रीरामजीने कहा—] हे मुनि! सुनो, मैं संतोंके गुणोंको कहता हूँ, जिनके कारण मैं उनके वशमें रहता हूँ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 677 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 संतन्ह के लच्छन रघुबीरा। कहहु नाथ भव भंजन भीरा।।
English explanation
O hero of Raghu’s lineage, Lord who destroys the distress of worldly existence, tell me the characteristics of saints.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संतन्ह | संतों | saints |
| के | के | of |
| लच्छन | लक्षण | characteristics |
| रघुबीरा | हे रघुकुल के वीर राम | O Rama, hero of Raghu’s lineage |
| कहहु | बताइए | tell me |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| भव | संसारजनित | of worldly existence |
| भंजन | नाश करने वाले | destroyer of |
| भीरा | भय और कष्ट | fear and distress |
2 सुनु मुनि संतन्ह के गुन कहऊँ। जिन्ह ते मैं उन्ह कें बस रहऊँ।।
English explanation
Listen, sage; I shall describe the virtues of saints that keep me under their sway.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| मुनि | हे मुनि | O sage |
| संतन्ह | संतों | saints |
| के | के | of |
| गुन | गुण | virtues |
| कहऊँ | मैं कहूँ | I shall describe |
| जिन्ह | जिन गुणों | which virtues |
| ते | के कारण | because of |
| मैं | मैं | I |
| उन्ह | उन संतों | those saints |
| कें | के | their |
| बस | वश में | under the sway |
| रहऊँ | रहता हूँ | remain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.45
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 677
- सहायक विषय
- नारद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 677, 678
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