अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे न भजहिं अस प्रभु भ्रम त्यागी। ग्यान रंक नर मंद अभागी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो मनुष्य भ्रमको त्यागकर ऐसे प्रभुको नहीं भजते, वे ज्ञानके कंगाल, दुर्बुद्धि और अभागे हैं। फिर नारद मुनि आदरसहित बोले—हे विज्ञान-विशारद श्रीरामजी! सुनिये—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 677 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जे न भजहिं अस प्रभु भ्रम त्यागी। ग्यान रंक नर मंद अभागी।।
पुनि सादर बोले मुनि नारद। सुनहु राम बिग्यान बिसारद।।
स्रोत अभिलेख 3.45 · पुस्तक पृ. 677, 678
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जे न भजहिं अस प्रभु भ्रम त्यागी। ग्यान रंक नर मंद अभागी।।
English explanation
Those who do not cast off delusion and worship such a Lord are impoverished in wisdom, dull-witted, and unfortunate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो लोग | those who |
| न | नहीं | not |
| भजहिं | भजन करते हैं | worship |
| अस | ऐसे | such a |
| प्रभु | प्रभु | Lord |
| भ्रम | भ्रम | delusion |
| त्यागी | त्यागकर | having cast off |
| ग्यान | ज्ञान में | in wisdom |
| रंक | दरिद्र | impoverished |
| नर | मनुष्य | people |
| मंद | मंदबुद्धि | dull-witted |
| अभागी | अभागे | unfortunate |
2 पुनि सादर बोले मुनि नारद। सुनहु राम बिग्यान बिसारद।।
English explanation
Then the sage Narada spoke respectfully: Listen, Rama, adept in profound spiritual understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| बोले | बोले | spoke |
| मुनि | मुनि | sage |
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| सुनहु | सुनिए | listen |
| राम | हे राम | O Rama |
| बिग्यान | तत्त्वज्ञान में | in spiritual understanding |
| बिसारद | निपुण | adept |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.45
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 677
- सहायक विषय
- नारद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 677, 678
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।