अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सापत ताड़त परुष कहंता। बिप्र पूज्य अस गावहिं संता।।
मूल पाठ
सापत ताड़त परुष कहंता। बिप्र पूज्य अस गावहिं संता।।
पूजिअ बिप्र सील गुन हीना। सूद्र न गुन गन ग्यान प्रबीना।।
स्रोत अभिलेख 3.34 · पुस्तक पृ. 666, 666
भावार्थ
मूल पाठ के बादशाप देता हुआ, मारता हुआ और कठोर वचन कहता हुआ भी ब्राह्मण पूजनीय है, ऐसा संत कहते हैं। शील और गुणसे हीन भी ब्राह्मण पूजनीय है। और गुणगणोंसे युक्त और ज्ञानमें निपुण भी शूद्र पूजनीय नहीं है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 666 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सापत ताड़त परुष कहंता। बिप्र पूज्य अस गावहिं संता।।
English explanation
AI-drafted interpretation: Even when cursing, striking, or speaking harshly, a Brahmin is worthy of reverence—so the saints declare.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सापत | शाप देते हुए | cursing |
| ताड़त | मारते हुए | striking |
| परुष | कठोर वचन | harsh words |
| कहंता | कहते हुए | speaking |
| बिप्र | ब्राह्मण | a Brahmin |
| पूज्य | पूजनीय | worthy of reverence |
| अस | ऐसा | thus |
| गावहिं | कहते हैं | declare |
| संता | संत | saints |
2 पूजिअ बिप्र सील गुन हीना। सूद्र न गुन गन ग्यान प्रबीना।।
English explanation
The line states that even a Brahmin lacking good conduct and virtues should be revered, but not a Shudra, even if accomplished in many virtues and knowledge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूजिअ | पूजा करनी चाहिए | should be revered |
| बिप्र | ब्राह्मण की | a Brahmin |
| सील | सदाचार | good conduct |
| गुन | गुण | virtues |
| हीना | से रहित | lacking |
| सूद्र | शूद्र की | a Shudra |
| न | नहीं | not |
| गुन | गुणों के | of virtues |
| गन | समूह | multitudes |
| ग्यान | ज्ञान में | in knowledge |
| प्रबीना | निपुण होने पर भी | even if accomplished |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 666
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 666, 666
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।