अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संशय सर्प ग्रसन उरगादः। शमन सुकर्कश तर्क विषादः।।
मूल पाठ
संशय सर्प ग्रसन उरगादः। शमन सुकर्कश तर्क विषादः।।
भव भंजन रंजन सुर यूथः। त्रातु सदा नो कृपा वरूथः।।
स्रोत अभिलेख 3.11 · पुस्तक पृ. 633, 635
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो संशयरूपी सर्पको ग्रसनेके लिये गरुड़ हैं, अत्यन्त कठोर तर्कसे उत्पन्न होनेवाले विषादका नाश करनेवाले हैं, आवागमनको मिटानेवाले और देवताओंके समूहको आनन्द देनेवाले हैं, वे कृपाके समूह श्रीरामजी सदा हमारी रक्षा करें॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 634 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 संशय सर्प ग्रसन उरगादः। शमन सुकर्कश तर्क विषादः।।
English explanation
You are Garuda who devours the serpent of doubt, and the one who stills the distress of harsh argument.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संशय | संशय रूपी | doubt pictured as |
| सर्प | सर्प को | a serpent |
| ग्रसन | निगलने वाले | devouring |
| उरगादः | गरुड़ | Garuda, the serpent-eater |
| शमन | शांत करने वाले | one who stills |
| सुकर्कश | अत्यंत कठोर | extremely harsh |
| तर्क | तर्क से उत्पन्न | arising from argument |
| विषादः | विषाद | distress |
2 भव भंजन रंजन सुर यूथः। त्रातु सदा नो कृपा वरूथः।।
English explanation
May Rama, who breaks worldly bondage, delights the hosts of gods, and is an armor of compassion, always protect us.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भव | संसार-बंधन का | of worldly bondage |
| भंजन | नाश करने वाले | destroyer |
| रंजन | आनंद देने वाले | delighter |
| सुर | देवताओं के | of gods |
| यूथः | समूह को | the hosts |
| त्रातु | रक्षा करें | may he protect |
| सदा | सदा | always |
| नो | हमारी | us |
| कृपा | कृपा रूपी | of compassion |
| वरूथः | कवच | armor |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 634
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 633, 635
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।