अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निर्गुण सगुण विषम सम रूपं। ज्ञान गिरा गोतीतमनूपं।।
मूल पाठ
निर्गुण सगुण विषम सम रूपं। ज्ञान गिरा गोतीतमनूपं।।
अमलमखिलमनवद्यमपारं। नौमि राम भंजन महि भारं।।
स्रोत अभिलेख 3.11 · पुस्तक पृ. 633, 635
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे निर्गुण, सगुण, विषम और समरूप! हे ज्ञान, वाणी और इन्द्रियोंसे अतीत! हे अनुपम,निर्मल, सम्पूर्ण दोषरहित, अनन्त एवं पृथ्वीका भार उतारनेवाले श्रीरामचन्द्रजी! मैं आपको नमस्कार करता हूँ॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 634 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 निर्गुण सगुण विषम सम रूपं। ज्ञान गिरा गोतीतमनूपं।।
English explanation
You are without attributes and with attributes, unequalled yet impartial; you are unique and beyond knowledge, speech, and the senses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निर्गुण | गुणों से परे | beyond attributes |
| सगुण | गुणों सहित | with attributes |
| विषम | जिनके समान कोई नहीं | unequalled |
| सम | समभाव वाले | impartial |
| रूपं | स्वरूप वाले | having such a form |
| ज्ञान | ज्ञान के | knowledge |
| गिरा | वाणी के | speech |
| गोतीतमनूपं | इंद्रियों से परे और अनुपम | beyond the senses and incomparable |
2 अमलमखिलमनवद्यमपारं। नौमि राम भंजन महि भारं।।
English explanation
I bow to Rama, pure, all-pervading, faultless, boundless, and the remover of the earth’s burden.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अमलमखिलमनवद्यमपारं | निर्मल, सर्वव्यापी, निर्दोष और अपार | pure, all-pervading, faultless, and boundless |
| नौमि | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
| राम | श्रीराम को | Rama |
| भंजन | दूर करने वाले | remover |
| महि | पृथ्वी का | of the earth |
| भारं | भार | burden |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 634
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 633, 635
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।