अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संत हृदय जस निर्मल बारी। बाँधे घाट मनोहर चारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउसका जल संतोंके हृदय-जैसा निर्मल है। मनको हरनेवाले सुन्दर चार घाट बँधे हुए हैं। भाँति-भाँतिके पशु जहाँ-तहाँ जल पी रहे हैं। मानो उदार दानी पुरुषोंके घर याचकोंकी भीड़ लगी हो!॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 672 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
संत हृदय जस निर्मल बारी। बाँधे घाट मनोहर चारी।।
जहँ तहँ पिअहिं बिबिध मृग नीरा। जनु उदार गृह जाचक भीरा।।
स्रोत अभिलेख 3.39 · पुस्तक पृ. 671, 672
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 संत हृदय जस निर्मल बारी। बाँधे घाट मनोहर चारी।।
English explanation
Its water was pure like a saint's heart, and four lovely bathing ghats had been built.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संत | संत का | of a saint |
| हृदय | हृदय | heart |
| जस | जैसा | like |
| निर्मल | स्वच्छ और शुद्ध | clear and pure |
| बारी | जल | water |
| बाँधे | बनाए हुए | built |
| घाट | जल तक उतरने के घाट | steps leading down to the water |
| मनोहर | सुंदर | lovely |
| चारी | चार | four |
2 जहँ तहँ पिअहिं बिबिध मृग नीरा। जनु उदार गृह जाचक भीरा।।
English explanation
Various animals drank water here and there, like a crowd of petitioners at a generous person's home.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | here |
| तहँ | तहाँ | there |
| पिअहिं | पीते हैं | drink |
| बिबिध | विविध प्रकार के | of various kinds |
| मृग | वन्य पशु | wild animals |
| नीरा | जल | water |
| जनु | मानो | as though |
| उदार | उदार व्यक्ति का | of a generous person |
| गृह | घर | home |
| जाचक | याचकों की | of petitioners |
| भीरा | भीड़ | a crowd |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.39
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 672
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 671, 672
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