अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
श्याम तामरस दाम शरीरं। जटा मुकुट परिधन मुनिचीरं।।
मूल पाठ
श्याम तामरस दाम शरीरं। जटा मुकुट परिधन मुनिचीरं।।
पाणि चाप शर कटि तूणीरं। नौमि निरंतर श्रीरघुवीरं।।
स्रोत अभिलेख 3.11 · पुस्तक पृ. 633, 635
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नीलकमलकी मालाके समान श्याम शरीरवाले! हे जटाओंका मुकुट और मुनियोंके (वल्कल) वस्त्र पहने हुए, हाथोंमें धनुष-बाण लिये तथा कमरमें तरकस कसे हुए श्रीरामजी! मैं आपको निरन्तर नमस्कार करता हूँ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 633 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 श्याम तामरस दाम शरीरं। जटा मुकुट परिधन मुनिचीरं।।
English explanation
Your body resembles a garland of dark lotuses; your matted hair forms a crown, and you wear an ascetic’s bark garments.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्याम | श्याम रंग के | dark-hued |
| तामरस | कमलों की | of lotuses |
| दाम | माला | garland |
| शरीरं | शरीर वाले | having a body |
| जटा | जटाओं का | of matted hair |
| मुकुट | मुकुट | crown |
| परिधन | पहनावा | attire |
| मुनिचीरं | मुनियों के वल्कल-वस्त्र | ascetics’ bark garments |
2 पाणि चाप शर कटि तूणीरं। नौमि निरंतर श्रीरघुवीरं।।
English explanation
I continually bow to glorious Rama, hero of Raghu’s line, with bow and arrow in hand and a quiver at his waist.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पाणि | हाथ में | in the hand |
| चाप | धनुष | bow |
| शर | बाण | arrow |
| कटि | कमर पर | at the waist |
| तूणीरं | तरकश | quiver |
| नौमि | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
| निरंतर | निरंतर | continually |
| श्रीरघुवीरं | श्रीराम, रघुकुल के वीर को | glorious Rama, hero of Raghu’s line |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 633
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 633, 635
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।