अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मोह विपिन घन दहन कृशानुः। संत सरोरुह कानन भानुः।।
मूल पाठ
मोह विपिन घन दहन कृशानुः। संत सरोरुह कानन भानुः।।
निशिचर करि वरूथ मृगराजः। त्रातु सदा नो भव खग बाजः।।
स्रोत अभिलेख 3.11 · पुस्तक पृ. 633, 635
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो मोहरूपी घने वनको जलानेके लिये अग्रि हैं, संतरूपी कमलोंके वनके प्रफुल्लित करनेके लिये सूर्य हैं, राक्षसरूपी हाथियोंके समूहके पछाडऩेके लिये सिंह हैं और भव (आवागमन) रूपी पक्षीके मारनेके लिये बाजरूप हैं, वे प्रभु सदा हमारी रक्षा करें॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 633 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मोह विपिन घन दहन कृशानुः। संत सरोरुह कानन भानुः।।
English explanation
You are the fire that burns the dense forest of delusion and the sun for the lotus grove of saints.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोह | मोह रूपी | of delusion |
| विपिन | वन | forest |
| घन | घना | dense |
| दहन | जलाने वाली | burning |
| कृशानुः | अग्नि | fire |
| संत | संत रूपी | saints pictured as |
| सरोरुह | कमलों के | lotuses |
| कानन | वन के | of the grove |
| भानुः | सूर्य | the sun |
2 निशिचर करि वरूथ मृगराजः। त्रातु सदा नो भव खग बाजः।।
English explanation
May Rama, the lion to the elephant herd of demons and the hawk to the bird of worldly existence, always protect us.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निशिचर | राक्षस रूपी | demons pictured as |
| करि | हाथियों के | elephants |
| वरूथ | झुंड के | of the herd |
| मृगराजः | सिंह | lion |
| त्रातु | रक्षा करें | may he protect |
| सदा | सदा | always |
| नो | हमारी | us |
| भव | संसार रूपी | worldly existence pictured as |
| खग | पक्षी के लिए | to the bird |
| बाजः | बाज | hawk |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 633
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 633, 635
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।