अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रुचिर रुप धरि प्रभु पहिं जाई। बोली बचन बहुत मुसुकाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवह सुन्दर रूप धरकर प्रभुके पास जाकर और बहुत मुसकराकर वचन बोली—न तो तुम्हारे समान कोई पुरुष है, न मेरे समान स्त्री! विधाताने यह संयोग (जोड़ा) बहुत विचारकर रचा है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 642 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रुचिर रुप धरि प्रभु पहिं जाई। बोली बचन बहुत मुसुकाई।।
तुम्ह सम पुरुष न मो सम नारी। यह सँजोग बिधि रचा बिचारी।।
स्रोत अभिलेख 3.17 · पुस्तक पृ. 641, 643
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 रुचिर रुप धरि प्रभु पहिं जाई। बोली बचन बहुत मुसुकाई।।
English explanation
Assuming a beautiful form, she approached Lord Rama and spoke with a broad smile.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रुचिर | सुंदर | beautiful |
| रुप | रूप | form |
| धरि | धारण करके | assuming |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| पहिं | के पास | near; to |
| जाई | जाकर | having gone |
| बोली | बोली | spoke |
| बचन | वचन | words |
| बहुत | बहुत | greatly |
| मुसुकाई | मुसकराकर | smiling |
2 तुम्ह सम पुरुष न मो सम नारी। यह सँजोग बिधि रचा बिचारी।।
English explanation
There is no man like you and no woman like me; the Creator has thoughtfully arranged this meeting.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुम्हारे | you |
| सम | समान | like |
| पुरुष | पुरुष | man |
| न | नहीं | none |
| मो | मेरे | me |
| सम | समान | like |
| नारी | स्त्री | woman |
| यह | यह | this |
| सँजोग | मिलन का संयोग | meeting; match |
| बिधि | विधाता, सृष्टिकर्ता | the Creator |
| रचा | रचा है | has arranged |
| बिचारी | सोच-समझकर | after due consideration |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 642
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 641, 643
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।