अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भ्राता पिता पुत्र उरगारी। पुरुष मनोहर निरखत नारी।।
मूल पाठ
भ्राता पिता पुत्र उरगारी। पुरुष मनोहर निरखत नारी।।
होइ बिकल सक मनहि न रोकी। जिमि रबिमनि द्रव रबिहि बिलोकी।।
स्रोत अभिलेख 3.17 · पुस्तक पृ. 641, 643
भावार्थ
मूल पाठ के बाद(काकभुशुण्डिजी कहते हैं—) हे गरुडज़ी! (शूर्पणखा-जैसी राक्षसी, धर्मज्ञानशून्य कामान्ध) स्त्री मनोहर पुरुषको देखकर, चाहे वह भाई, पिता, पुत्र ही हो, विकल हो जाती है और मनको नहीं रोक सकती। जैसे सूर्यकान्तमणि सूर्यको देखकर द्रवित हो जाती है (ज्वालासे पिघल जाती है)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 642 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भ्राता पिता पुत्र उरगारी। पुरुष मनोहर निरखत नारी।।
English explanation
O Garuda, on seeing an attractive man—even her brother, father, or son—a woman…
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भ्राता | भाई | brother |
| पिता | पिता | father |
| पुत्र | पुत्र | son |
| उरगारी | हे गरुड़, सर्पों के शत्रु | O Garuda, enemy of serpents |
| पुरुष | पुरुष को | a man |
| मनोहर | सुंदर, मन को आकर्षित करने वाला | attractive, captivating |
| निरखत | देखते ही | on seeing |
| नारी | स्त्री | a woman |
2 होइ बिकल सक मनहि न रोकी। जिमि रबिमनि द्रव रबिहि बिलोकी।।
English explanation
…becomes agitated and cannot restrain her mind, just as the sunstone melts upon beholding the sun.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होइ | हो जाती है | becomes |
| बिकल | व्याकुल | agitated |
| सक | सकती है | can |
| मनहि | मन को | the mind |
| न | नहीं | not |
| रोकी | रोकना | restrain |
| जिमि | जैसे | just as |
| रबिमनि | सूर्यकांत मणि | sunstone |
| द्रव | द्रवित होती है | melts |
| रबिहि | सूर्य को | the sun |
| बिलोकी | देखकर | on beholding |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 642
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 641, 643
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।