अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रिषि निकाय मुनिबर गति देखि। सुखी भए निज हृदयँ बिसेषी।।
मूल पाठ
रिषि निकाय मुनिबर गति देखि। सुखी भए निज हृदयँ बिसेषी।।
अस्तुति करहिं सकल मुनि बृंदा। जयति प्रनत हित करुना कंदा।।
स्रोत अभिलेख 3.9 · पुस्तक पृ. 630, 630
भावार्थ
मूल पाठ के बादऋषिसमूह मुनिश्रेष्ठ शरभंगजीकी यह [दुर्लभ] गति देखकर अपने हृदयमें विशेषरूपसे सुखी हुए। समस्त मुनिवृन्द श्रीरामजीकी स्तुति कर रहे हैं [और कह रहे हैं] शरणागतहितकारी करुणाकन्द (करुणाके मूल) प्रभुकी जय हो!॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 630 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रिषि निकाय मुनिबर गति देखि। सुखी भए निज हृदयँ बिसेषी।।
English explanation
Seeing the blessed destination of the eminent sage, the assembly of seers became deeply happy at heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिषि | ऋषियों का | of seers |
| निकाय | समुदाय | assembly |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि की | of the eminent sage |
| गति | प्राप्त परम गति | attained destination |
| देखि | देखकर | seeing |
| सुखी | प्रसन्न | happy |
| भए | हुए | became |
| निज | अपने | their own |
| हृदयँ | हृदय में | in their hearts |
| बिसेषी | अत्यंत | exceedingly |
2 अस्तुति करहिं सकल मुनि बृंदा। जयति प्रनत हित करुना कंदा।।
English explanation
All the assembled sages offer praise: ‘Glory to you, benefactor of those who seek refuge, source of compassion!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस्तुति | स्तुति | praise |
| करहिं | करते हैं | offer |
| सकल | सभी | all |
| मुनि | मुनियों के | of sages |
| बृंदा | समूह | assemblies |
| जयति | जय हो | glory to you |
| प्रनत | शरणागतों का | of those seeking refuge |
| हित | हित करने वाले | benefactor |
| करुना | करुणा के | of compassion |
| कंदा | मूल स्रोत | root source |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 630
- सहायक विषय
- राक्षस-वधकी प्रतिज्ञा करना
- मुद्रित पृष्ठ
- 630, 630
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।