अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि रघुनाथ चले बन आगे। मुनिबर बृंद बिपुल सँग लागे।।
मूल पाठ
पुनि रघुनाथ चले बन आगे। मुनिबर बृंद बिपुल सँग लागे।।
अस्थि समूह देखि रघुराया। पूछी मुनिन्ह लागि अति दाया।।
स्रोत अभिलेख 3.9 · पुस्तक पृ. 630, 630
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर श्रीरघुनाथजी आगे वनमें चले। श्रेष्ठ मुनियोंके बहुत-से समूह उनके साथ हो लिये। हड्डियोंका ढेर देखकर श्रीरघुनाथजीको बड़ी दया आयी, उन्होंने मुनियोंसे पूछा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 630 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पुनि रघुनाथ चले बन आगे। मुनिबर बृंद बिपुल सँग लागे।।
English explanation
Then Rama proceeded farther into the forest, and many groups of eminent sages accompanied him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
| चले | चले | proceeded |
| बन | वन में | in the forest |
| आगे | आगे | farther ahead |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनियों के | of eminent sages |
| बृंद | समूह | groups |
| बिपुल | अनेक | many |
| सँग | साथ | along with him |
| लागे | चलने लगे | began accompanying |
2 अस्थि समूह देखि रघुराया। पूछी मुनिन्ह लागि अति दाया।।
English explanation
Seeing a heap of bones, Rama, king of Raghu’s line, felt deep compassion and asked the sages about it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस्थि | हड्डियों का | of bones |
| समूह | ढेर | heap |
| देखि | देखकर | seeing |
| रघुराया | रघुकुल के राजा राम | Rama, king of Raghu’s line |
| पूछी | पूछा | asked |
| मुनिन्ह | मुनियों से | the sages |
| लागि | उत्पन्न हुई | arose |
| अति | बहुत | deep |
| दाया | दया | compassion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 630
- सहायक विषय
- राक्षस-वधकी प्रतिज्ञा करना
- मुद्रित पृष्ठ
- 630, 630
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।