अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानतहुँ पूछिअ कस स्वामी। सबदरसी तुम्ह अंतरजामी।।
मूल पाठ
जानतहुँ पूछिअ कस स्वामी। सबदरसी तुम्ह अंतरजामी।।
निसिचर निकर सकल मुनि खाए। सुनि रघुबीर नयन जल छाए।।
स्रोत अभिलेख 3.9 · पुस्तक पृ. 630, 630
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[मुनियोंने कहा—] हे स्वामी! आप सर्वदर्शी (सर्वज्ञ) और अन्तर्यामी (सबके हृदयकी जाननेवाले) हैं। जानते हुए भी [अनजानकी तरह] हमसे कैसे पूछ रहे हैं? राक्षसोंके दलोंने सब मुनियोंको खा डाला है [ये सब उन्हींकी हड्डियोंके ढेर हैं]। यह सुनते ही श्रीरघुवीरके नेत्रोंमें जल छा गया (उनकी आँखोंमें करुणाके आँसू भर आये)॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 630 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जानतहुँ पूछिअ कस स्वामी। सबदरसी तुम्ह अंतरजामी।।
English explanation
The sages said, ‘Lord, why do you ask even though you know? You see everything and know what lies within everyone.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानतहुँ | जानते हुए भी | even though knowing |
| पूछिअ | आप पूछते हैं | you ask |
| कस | क्यों | why |
| स्वामी | हे स्वामी | O Lord |
| सबदरसी | सब कुछ देखने वाले | all-seeing |
| तुम्ह | आप | you |
| अंतरजामी | सबके अंतःकरण को जानने वाले | knower of everyone’s inner heart |
2 निसिचर निकर सकल मुनि खाए। सुनि रघुबीर नयन जल छाए।।
English explanation
‘Bands of demons devoured all these sages.’ Hearing this, Rama’s eyes filled with tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निसिचर | राक्षसों के | of demons |
| निकर | झुंडों ने | bands |
| सकल | सभी | all |
| मुनि | मुनियों को | the sages |
| खाए | खा लिया | devoured |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम के | of Rama, hero of Raghu’s line |
| नयन | नेत्रों में | in the eyes |
| जल | आँसू | tears |
| छाए | भर आए | welled up |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 630
- सहायक विषय
- राक्षस-वधकी प्रतिज्ञा करना
- मुद्रित पृष्ठ
- 630, 630
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।