अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कहि जोग अगिनि तनु जारा। राम कृपाँ बैकुंठ सिधारा।।
मूल पाठ
अस कहि जोग अगिनि तनु जारा। राम कृपाँ बैकुंठ सिधारा।।
ताते मुनि हरि लीन न भयऊ। प्रथमहिं भेद भगति बर लयऊ।।
स्रोत अभिलेख 3.9 · पुस्तक पृ. 630, 630
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसा कहकर शरभंगजीने योगाग्रिसे अपने शरीरको जला डाला और श्रीरामजीकी कृपासे वे वैकुण्ठको चले गये। मुनि भगवान्में लीन इसलिये नहीं हुए कि उन्होंने पहले ही भेद-भक्तिका वर ले लिया था॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 630 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अस कहि जोग अगिनि तनु जारा। राम कृपाँ बैकुंठ सिधारा।।
English explanation
Having said this, the sage burned his body in the fire of yoga and, through Rama’s grace, departed for Vaikuntha.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| जोग | योग की | of yoga |
| अगिनि | अग्नि | fire |
| तनु | शरीर | body |
| जारा | जला दिया | burned |
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| कृपाँ | कृपा से | through grace |
| बैकुंठ | विष्णु का धाम बैकुंठ | Vaikuntha, Vishnu’s abode |
| सिधारा | चले गए | departed |
2 ताते मुनि हरि लीन न भयऊ। प्रथमहिं भेद भगति बर लयऊ।।
English explanation
The sage did not merge into Hari because he had already obtained the boon of devotion that preserves distinction from the Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताते | इस कारण | for this reason |
| मुनि | मुनि | the sage |
| हरि | भगवान हरि में | into Lord Hari |
| लीन | विलीन | merged |
| न | नहीं | not |
| भयऊ | हुए | became |
| प्रथमहिं | पहले ही | already beforehand |
| भेद | भगवान से अलग अस्तित्व का भेद | distinction from the Lord |
| भगति | भक्ति | devotion |
| बर | वरदान | boon |
| लयऊ | ले लिया था | had obtained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 630
- सहायक विषय
- राक्षस-वधकी प्रतिज्ञा करना
- मुद्रित पृष्ठ
- 630, 630
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।