अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि मख राखन गयउ कुमारा। बिनु फर सर रघुपति मोहि मारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयही राजकुमार मुनि विश्वामित्रके यज्ञकी रक्षाके लिये गये थे। उस समय श्रीरघुनाथजीने बिना फलका बाण मुझे मारा था, जिससे मैं क्षणभरमें सौ योजनपर आ गिरा। उनसे वैर करनेमें भलाई नहीं है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 653 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मुनि मख राखन गयउ कुमारा। बिनु फर सर रघुपति मोहि मारा।।
सत जोजन आयउँ छन माहीं। तिन्ह सन बयरु किएँ भल नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 3.25 · पुस्तक पृ. 653, 653
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मुनि मख राखन गयउ कुमारा। बिनु फर सर रघुपति मोहि मारा।।
English explanation
Prince Rama went to protect the sage Vishvamitra’s sacrifice. The Lord of Raghu’s line struck me with an arrow without a head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि विश्वामित्र का | of the sage Vishvamitra |
| मख | यज्ञ | sacrifice |
| राखन | रक्षा करने | to protect |
| गयउ | गए | went |
| कुमारा | राजकुमार राम | Prince Rama |
| बिनु | बिना | without |
| फर | बाण का फलक; नुकीला सिरा | arrowhead |
| सर | बाण से | with an arrow |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम ने | Rama, Lord of Raghu’s line |
| मोहि | मुझे; मारीच को | me; Maricha |
| मारा | मारा; प्रहार किया | struck |
2 सत जोजन आयउँ छन माहीं। तिन्ह सन बयरु किएँ भल नाहीं।।
English explanation
In a moment I landed a hundred yojanas away. Making an enemy of him is not wise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत | सौ | a hundred |
| जोजन | योजन; दूरी की प्राचीन इकाई | yojanas; an ancient distance unit |
| आयउँ | मैं आ पहुँचा | I arrived; I landed |
| छन | क्षण | a moment |
| माहीं | में; के भीतर | in; within |
| तिन्ह | उनके; राम के | him; Rama |
| सन | साथ; से | with |
| बयरु | वैर | enmity |
| किएँ | करने पर; करना | in making; to make |
| भल | अच्छा; हितकर | good; beneficial |
| नाहीं | नहीं है | is not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 653
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 653, 653
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।