अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेहिं पुनि कहा सुनहु दससीसा। ते नररुप चराचर ईसा।।
मूल पाठ
तेहिं पुनि कहा सुनहु दससीसा। ते नररुप चराचर ईसा।।
तासों तात बयरु नहिं कीजे। मारें मरिअ जिआएँ जीजै।।
स्रोत अभिलेख 3.25 · पुस्तक पृ. 653, 653
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब उसने (मारीचने) कहा—हे दशशीश! सुनिये। वे मनुष्यरूपमें चराचरके ईश्वर हैं। हे तात! उनसे वैर न कीजिये। उन्हींके मारनेसे मरना और उनके जिलानेसे जीना होता है (सबका जीवन- मरण उन्हींके अधीन है)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 653 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तेहिं पुनि कहा सुनहु दससीसा। ते नररुप चराचर ईसा।।
English explanation
Maricha then said, 'Listen, ten-headed Ravana: he is the Lord of all moving and unmoving beings in human form.'
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहिं | उसने; मारीच ने | he; Maricha |
| पुनि | फिर | then; again |
| कहा | कहा | said |
| सुनहु | सुनो | listen |
| दससीसा | हे दस सिरों वाले रावण | O ten-headed Ravana |
| ते | वे; राम | he; Rama |
| नररुप | मानव रूप में | in human form |
| चराचर | चल और अचल समस्त सृष्टि के | of all moving and unmoving creation |
| ईसा | स्वामी | Lord |
2 तासों तात बयरु नहिं कीजे। मारें मरिअ जिआएँ जीजै।।
English explanation
Dear sir, do not make an enemy of him. When he kills, one dies; when he grants life, one lives.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तासों | उनसे; राम से | with him; with Rama |
| तात | हे तात; प्रिय महोदय | dear sir |
| बयरु | वैर; शत्रुता | enmity |
| नहिं | नहीं; मत | not; do not |
| कीजे | कीजिए | make; undertake |
| मारें | उनके मारने पर | when he kills |
| मरिअ | मृत्यु होती है | one dies |
| जिआएँ | उनके जिलाने पर | when he gives life |
| जीजै | जीवन मिलता है; जीवित रहा जाता है | one lives |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 653
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 653, 653
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।