अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भइ मम कीट भृंग की नाई। जहँ तहँ मैं देखउँ दोउ भाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमेरी दशा तो भृङ्गीके कीड़ेकी-सी हो गयी है। अब मैं जहाँ-तहाँ श्रीराम-लक्ष्मण दोनों भाइयोंको ही देखता हूँ। और हे तात! यदि वे मनुष्य हैं तो भी बड़े शूरवीर हैं। उनसे विरोध करनेमें पूरा न पड़ेगा (सफलता नहीं मिलेगी)॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 653 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भइ मम कीट भृंग की नाई। जहँ तहँ मैं देखउँ दोउ भाई।।
जौं नर तात तदपि अति सूरा। तिन्हहि बिरोधि न आइहि पूरा।।
स्रोत अभिलेख 3.25 · पुस्तक पृ. 653, 653
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भइ मम कीट भृंग की नाई। जहँ तहँ मैं देखउँ दोउ भाई।।
English explanation
My condition has become like that of the insect in the wasp analogy: wherever I look, I see both brothers, Rama and Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भइ | हो गई है | has become |
| मम | मेरी; मेरी दशा | my; my condition |
| कीट | कीड़ा | insect |
| भृंग | भृंग; दृष्टांत का ततैया-सदृश कीट | the wasp-like insect of the analogy |
| की | के | of |
| नाई | समान; जैसी | like; similar to |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| तहँ | वहाँ | there |
| मैं | मैं; मारीच | I; Maricha |
| देखउँ | देखता हूँ | see |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई; राम और लक्ष्मण | brothers; Rama and Lakshmana |
2 जौं नर तात तदपि अति सूरा। तिन्हहि बिरोधि न आइहि पूरा।।
English explanation
Dear sir, even if they are human, they are still exceedingly valiant. You will not succeed by opposing them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि; भले ही | if; even if |
| नर | मनुष्य | human |
| तात | हे तात; प्रिय महोदय | dear sir |
| तदपि | तब भी | even then; nevertheless |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| सूरा | वीर; पराक्रमी | valiant; mighty |
| तिन्हहि | उन्हीं का; उन दोनों का | them; those two |
| बिरोधि | विरोध करके | by opposing |
| न | नहीं | not |
| आइहि | आओगे; हो सकोगे | will become; will manage |
| पूरा | सफल; पार पाने वाले | successful; able to prevail |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 653
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 653, 653
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।