अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि अगस्ति कर सिष्य सुजाना। नाम सुतीछन रति भगवाना।।
मूल पाठ
मुनि अगस्ति कर सिष्य सुजाना। नाम सुतीछन रति भगवाना।।
मन क्रम बचन राम पद सेवक। सपनेहुँ आन भरोस न देवक।।
स्रोत अभिलेख 3.1 · पुस्तक पृ. 631, 633
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुनि अगस्त्यजीके एक सुतीक्ष्ण नामक सुजान (ज्ञानी) शिष्य थे, उनकी भगवान्में प्रीति थी। वे मन, वचन और कर्मसे श्रीरामजीके चरणोंके सेवक थे। उन्हें स्वप्रमें भी किसी दूसरे देवताका भरोसा नहीं था॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 631 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मुनि अगस्ति कर सिष्य सुजाना। नाम सुतीछन रति भगवाना।।
English explanation
AI draft: Sage Agastya had a discerning disciple named Sutikshna, whose love was directed toward the Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | ऋषि | sage |
| अगस्ति | अगस्त्य ऋषि | the sage Agastya |
| कर | के | of |
| सिष्य | शिष्य | disciple |
| सुजाना | विवेकशील | discerning |
| नाम | नाम | name |
| सुतीछन | सुतीक्ष्ण नामक मुनि | Sutikshna, the sage |
| रति | प्रेम | love |
| भगवाना | भगवान में | toward the Lord |
2 मन क्रम बचन राम पद सेवक। सपनेहुँ आन भरोस न देवक।।
English explanation
He served Rama’s feet in thought, deed, and speech; even in dreams he relied on no other deity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन से | in thought |
| क्रम | कर्म से | in deed |
| बचन | वचन से | in speech |
| राम | राम के | Rama’s |
| पद | चरण | feet |
| सेवक | सेवक | servant |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in dreams |
| आन | अन्य | other |
| भरोस | भरोसा | reliance |
| न | नहीं | not |
| देवक | देवता का | on a deity |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 631
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 631, 633
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।