अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु आगवनु श्रवन सुनि पावा। करत मनोरथ आतुर धावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउन्होंने ज्यों ही प्रभुका आगमन कानोंसे सुन पाया, त्यों ही अनेक प्रकारके मनोरथ करते हुए वे आतुरता (शीघ्रता) से दौड़ चले। हे विधाता! क्या दीनबन्धु श्रीरघुनाथजी मुझ-जैसे दुष्टपर भी दया करेंगे?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 631 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रभु आगवनु श्रवन सुनि पावा। करत मनोरथ आतुर धावा।।
हे बिधि दीनबंधु रघुराया। मो से सठ पर करिहहिं दाया।।
स्रोत अभिलेख 3.1 · पुस्तक पृ. 631, 633
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रभु आगवनु श्रवन सुनि पावा। करत मनोरथ आतुर धावा।।
English explanation
Hearing of the Lord’s arrival, he ran eagerly, cherishing hopes in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम का | of Lord Rama |
| आगवनु | आगमन | arrival |
| श्रवन | कानों से | with his ears |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| पावा | जान पाया | came to know |
| करत | करते हुए | entertaining |
| मनोरथ | मन की अभिलाषाएँ | cherished hopes |
| आतुर | उत्सुक होकर | eagerly |
| धावा | दौड़ा | ran |
2 हे बिधि दीनबंधु रघुराया। मो से सठ पर करिहहिं दाया।।
English explanation
O Creator! Will Rama, king of Raghu’s line and friend of the lowly, show mercy to a fool like me?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हे | हे | O |
| बिधि | विधाता | Creator |
| दीनबंधु | दीनों के बंधु | friend of the lowly |
| रघुराया | रघुकुल के राजा राम | Rama, king of Raghu’s line |
| मो | मुझ | me |
| से | जैसे | like |
| सठ | मूर्ख | fool |
| पर | पर | upon |
| करिहहिं | करेंगे | will show |
| दाया | दया | mercy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 631
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 631, 633
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।