अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि अकुलाइ उठा तब कैसें। बिकल हीन मनि फनि बर जैसें।।
मूल पाठ
मुनि अकुलाइ उठा तब कैसें। बिकल हीन मनि फनि बर जैसें।।
आगें देखि राम तन स्यामा। सीता अनुज सहित सुख धामा।।
स्रोत अभिलेख 3.1 · पुस्तक पृ. 631, 633
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब (अपने इष्ट-स्वरूपके अन्तर्धान होते ही) मुनि कैसे व्याकुल होकर उठे, जैसे श्रेष्ठ (मणिधर) सर्प मणिके बिना व्याकुल हो जाता है। मुनिने अपने सामने सीताजी और लक्ष्मणजीसहित श्यामसुन्दर-विग्रह सुखधाम श्रीरामजीको देखा॥ १०॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 632 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मुनि अकुलाइ उठा तब कैसें। बिकल हीन मनि फनि बर जैसें।।
English explanation
Then the sage rose in agitation, like a mighty serpent distraught at losing its jewel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि | the sage |
| अकुलाइ | व्याकुल होकर | becoming agitated |
| उठा | उठे | rose |
| तब | तब | then |
| कैसें | किस तरह | in what manner |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| हीन | रहित | bereft of |
| मनि | मणि | jewel |
| फनि | सर्प | serpent |
| बर | श्रेष्ठ | mighty |
| जैसें | जैसे | like |
2 आगें देखि राम तन स्यामा। सीता अनुज सहित सुख धामा।।
English explanation
Before him he saw dark-bodied Rama, the abode of joy, together with Sita and his younger brother.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आगें | सामने | in front |
| देखि | देखकर | seeing |
| राम | राम को | Rama |
| तन | शरीर | body |
| स्यामा | श्याम रंग का | dark-hued |
| सीता | सीता | Sita, Rama’s wife |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | his younger brother Lakshmana |
| सहित | सहित | together with |
| सुख | सुख का | of joy |
| धामा | धाम | abode |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 632
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 631, 633
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।