अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनिहि राम बहु भाँति जगावा। जाग न ध्यानजनित सुख पावा।।
मूल पाठ
मुनिहि राम बहु भाँति जगावा। जाग न ध्यानजनित सुख पावा।।
भूप रूप तब राम दुरावा। हृदयँ चतुर्भुज रूप देखावा।।
स्रोत अभिलेख 3.1 · पुस्तक पृ. 631, 633
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीने मुनिको बहुत प्रकारसे जगाया, पर मुनि नहीं जागे; क्योंकि उन्हें प्रभुके ध्यानका सुख प्राप्त हो रहा था। तब श्रीरामजीने अपने राजरूपको छिपा लिया और उनके हृदयमें अपना चतुर्भुजरूप प्रकट किया॥ ९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 632 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मुनिहि राम बहु भाँति जगावा। जाग न ध्यानजनित सुख पावा।।
English explanation
Rama tried in many ways to awaken the sage, but he did not wake, experiencing the bliss born of meditation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनिहि | मुनि को | the sage |
| राम | राम ने | Rama |
| बहु | अनेक | many |
| भाँति | तरह से | in ways |
| जगावा | जगाने का प्रयत्न किया | tried to awaken |
| जाग | जागे | awoke |
| न | नहीं | not |
| ध्यानजनित | ध्यान से उत्पन्न | born of meditation |
| सुख | सुख | bliss |
| पावा | अनुभव किया | experienced |
2 भूप रूप तब राम दुरावा। हृदयँ चतुर्भुज रूप देखावा।।
English explanation
Then Rama concealed his royal form and showed his four-armed form in the sage’s heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूप | राजा का | royal |
| रूप | रूप | form |
| तब | तब | then |
| राम | राम ने | Rama |
| दुरावा | छिपाया | concealed |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| चतुर्भुज | चार भुजाओं वाला | four-armed |
| रूप | रूप | form |
| देखावा | दिखाया | showed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 632
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 631, 633
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।