अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनिहि मिलत अस सोह कृपाला। कनक तरुहि जनु भेंट तमाला।।
मूल पाठ
मुनिहि मिलत अस सोह कृपाला। कनक तरुहि जनु भेंट तमाला।।
राम बदनु बिलोक मुनि ठाढ़ा। मानहुँ चित्र माझ लिखि काढ़ा।।
स्रोत अभिलेख 3.1 · पुस्तक पृ. 631, 633
भावार्थ
मूल पाठ के बादकृपालु श्रीरामचन्द्रजी मुनिसे मिलते हुए ऐसे शोभित हो रहे हैं, मानो सोनेके वृक्षसे तमालका वृक्ष गले लगकर मिल रहा हो। मुनि [निस्तब्ध] खड़े हुए [टकटकी लगाकर] श्रीरामजीका मुख देख रहे हैं, मानो चित्रमें लिखकर बनाये गये हों॥ १२॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 633 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मुनिहि मिलत अस सोह कृपाला। कनक तरुहि जनु भेंट तमाला।।
English explanation
Embracing the sage, compassionate Rama looked as though a tamala tree were embracing a golden tree.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनिहि | मुनि से | the sage |
| मिलत | मिलते हुए | embracing |
| अस | ऐसे | thus |
| सोह | शोभित हैं | looks beautiful |
| कृपाला | कृपालु राम | compassionate Rama |
| कनक | सोने का | golden |
| तरुहि | वृक्ष से | a tree |
| जनु | मानो | as though |
| भेंट | आलिंगन करता हो | were embracing |
| तमाला | तमाल वृक्ष | a dark tamala tree |
2 राम बदनु बिलोक मुनि ठाढ़ा। मानहुँ चित्र माझ लिखि काढ़ा।।
English explanation
Gazing at Rama’s face, the sage stood still, as though painted into a picture.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम का | Rama’s |
| बदनु | मुख | face |
| बिलोक | निहारकर | gazing at |
| मुनि | मुनि | the sage |
| ठाढ़ा | खड़े रहे | stood |
| मानहुँ | मानो | as though |
| चित्र | चित्र | picture |
| माझ | में | within |
| लिखि | चित्रित करके | by drawing |
| काढ़ा | अंकित किए गए | depicted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 633
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 631, 633
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।