अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मातु पिता भ्राता हितकारी। मितप्रद सब सुनु राजकुमारी।।
मूल पाठ
मातु पिता भ्राता हितकारी। मितप्रद सब सुनु राजकुमारी।।
अमित दानि भर्ता बयदेही। अधम सो नारि जो सेव न तेही।।
स्रोत अभिलेख 3.5 · पुस्तक पृ. 625, 627
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे राजकुमारी! सुनिये, माता, पिता, भाई सभी हित करनेवाले हैं, परन्तु ये सब एक सीमातक ही [सुख] देनेवाले हैं। परन्तु हे जानकी! पति तो [मोक्षरूप] असीम [सुख] देनेवाला है। वह स्त्री अधम है, जो ऐसे पतिकी सेवा नहीं करती॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 625 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मातु पिता भ्राता हितकारी। मितप्रद सब सुनु राजकुमारी।।
English explanation
Listen, princess: mother, father, and brother wish you well, but all give only limited happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | माता | mother |
| पिता | पिता | father |
| भ्राता | भाई | brother |
| हितकारी | हित चाहने वाले | well-wishers |
| मितप्रद | सीमित सुख देने वाले | givers of limited happiness |
| सब | सभी | all |
| सुनु | सुनो | listen |
| राजकुमारी | हे राजकुमारी सीता | O princess Sita |
2 अमित दानि भर्ता बयदेही। अधम सो नारि जो सेव न तेही।।
English explanation
O daughter of Videha, a husband gives boundlessly; a woman who does not serve him is base.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अमित | असीम | boundless |
| दानि | देने वाला | giver |
| भर्ता | पति | husband |
| बयदेही | हे विदेह-कन्या सीता | O Sita, daughter of Videha |
| अधम | नीच | base |
| सो | वह | that |
| नारि | स्त्री | woman |
| जो | जो | who |
| सेव | सेवा करती | serves |
| न | नहीं | not |
| तेही | उस पति की | that husband |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 625
- सहायक विषय
- श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 625, 627
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