अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दिब्य बसन भूषन पहिराए। जे नित नूतन अमल सुहाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऔर उन्हें ऐसे दिव्य वस्त्र और आभूषण पहनाये, जो नित्य-नये निर्मल और सुहावने बने रहते हैं। फिर ऋषिपत्नी उनके बहाने मधुर और कोमल वाणीसे स्त्रियोंके कुछ धर्म बखानकर कहने लगीं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 625 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दिब्य बसन भूषन पहिराए। जे नित नूतन अमल सुहाए।।
कह रिषिबधू सरस मृदु बानी। नारिधर्म कछु ब्याज बखानी।।
स्रोत अभिलेख 3.5 · पुस्तक पृ. 625, 627
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 दिब्य बसन भूषन पहिराए। जे नित नूतन अमल सुहाए।।
English explanation
She dressed Sita in divine garments and ornaments that remain ever new, spotless, and beautiful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दिब्य | दिव्य | divine |
| बसन | वस्त्र | garments |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| पहिराए | पहनाए | put on her |
| जे | जो | which |
| नित | सदा | always |
| नूतन | नए | new |
| अमल | निर्मल | spotless |
| सुहाए | सुंदर | beautiful |
2 कह रिषिबधू सरस मृदु बानी। नारिधर्म कछु ब्याज बखानी।।
English explanation
The sage’s wife spoke in sweet, gentle words, taking the occasion to explain something of a woman’s duties.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहती हैं | speaks |
| रिषिबधू | ऋषि की पत्नी अनुसूया | Anasuya, the sage’s wife |
| सरस | मधुर | sweet |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी | speech |
| नारिधर्म | स्त्री के कर्तव्य | a woman’s duties |
| कछु | कुछ | something of |
| ब्याज | बहाने से; प्रसंग लेकर | by way of this occasion |
| बखानी | वर्णन किया | explained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 625
- सहायक विषय
- श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 625, 627
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।