अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अनुसुइया के पद गहि सीता। मिली बहोरि सुसील बिनीता।।
मूल पाठ
अनुसुइया के पद गहि सीता। मिली बहोरि सुसील बिनीता।।
रिषिपतिनी मन सुख अधिकाई। आसिष देइ निकट बैठाई।।
स्रोत अभिलेख 3.5 · पुस्तक पृ. 625, 627
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर परम शीलवती और विनम्र श्रीसीताजी [अत्रिजीकी पत्नी] अनसूयाजीके चरण पकड़कर उनसे मिलीं। ऋषिपत्नीके मनमें बड़ा सुख हुआ। उन्होंने आशिष देकर सीताजीको पास बैठा लिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 625 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अनुसुइया के पद गहि सीता। मिली बहोरि सुसील बिनीता।।
English explanation
Virtuous and humble Sita clasped Anasuya’s feet and greeted her again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनुसुइया | अत्रि ऋषि की पत्नी अनुसूया | Anasuya, the wife of sage Atri |
| के | के | of |
| पद | चरण | feet |
| गहि | पकड़कर | having clasped |
| सीता | राम की पत्नी सीता | Sita, Rama’s wife |
| मिली | मिलीं | met; greeted |
| बहोरि | फिर | again |
| सुसील | सुशील | virtuous |
| बिनीता | विनम्र | humble |
2 रिषिपतिनी मन सुख अधिकाई। आसिष देइ निकट बैठाई।।
English explanation
The sage’s wife felt great joy; she blessed Sita and seated her nearby.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिषिपतिनी | ऋषि की पत्नी अनुसूया | the sage’s wife, Anasuya |
| मन | मन में | in her heart |
| सुख | आनंद | joy |
| अधिकाई | बहुत बढ़ा | grew greatly |
| आसिष | आशीर्वाद | blessings |
| देइ | देकर | having given |
| निकट | पास | nearby |
| बैठाई | बैठाया | seated her |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 625
- सहायक विषय
- श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 625, 627
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