अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मरम बचन जब सीता बोला। हरि प्रेरित लछिमन मन डोला।।
मूल पाठ
मरम बचन जब सीता बोला। हरि प्रेरित लछिमन मन डोला।।
बन दिसि देव सौंपि सब काहू। चले जहाँ रावन ससि राहू।।
स्रोत अभिलेख 3.28 · पुस्तक पृ. 656, 658
भावार्थ
मूल पाठ के बादइसपर जब सीताजी कुछ मर्म-वचन (हृदयमें चुभनेवाले वचन) कहने लगीं, तब भगवान्की प्रेरणासे लक्ष्मणजीका मन भी चञ्चल हो उठा। वे श्रीसीताजीको वन और दिशाओंके देवताओंको सौंपकर वहाँ चले जहाँ रावणरूपी चन्द्रमाके लिये राहुरूप श्रीरामजी थे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 657 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मरम बचन जब सीता बोला। हरि प्रेरित लछिमन मन डोला।।
English explanation
When Sita spoke words that wounded him deeply, Lakshmana’s resolve wavered under Hari’s prompting.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मरम | मर्म को चोट पहुँचाने वाले | piercing the heart |
| बचन | वचन | words |
| जब | जब | when |
| सीता | सीता ने | Sita |
| बोला | कहे | spoke |
| हरि | भगवान हरि की ओर से | by Lord Hari |
| प्रेरित | प्रेरित | prompted |
| लछिमन | लक्ष्मण का | Lakshmana’s |
| मन | मन; संकल्प | mind; resolve |
| डोला | विचलित हुआ | wavered |
2 बन दिसि देव सौंपि सब काहू। चले जहाँ रावन ससि राहू।।
English explanation
Entrusting Sita to all the deities of the forest and directions, Lakshmana went where Rama was—the Rahu to Ravana’s moon.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बन | वन के | of the forest |
| दिसि | दिशाओं के | of the directions |
| देव | देवताओं को | to the deities |
| सौंपि | सीता को सौंपकर | having entrusted Sita |
| सब | सभी | all |
| काहू | को | to each of them |
| चले | लक्ष्मण चले | Lakshmana departed |
| जहाँ | जहाँ | where |
| रावन | रावणरूपी | Ravana as |
| ससि | चंद्रमा के लिए | the moon, for which |
| राहू | राहुरूपी राम | Rama as Rahu, the eclipsing power |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 657
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना · श्रीसीताहरण और श्रीसीता-विलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 656, 658
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।