अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जाहु बेगि संकट अति भ्राता। लछिमन बिहसि कहा सुनु माता।।
मूल पाठ
जाहु बेगि संकट अति भ्राता। लछिमन बिहसि कहा सुनु माता।।
भृकुटि बिलास सृष्टि लय होई। सपनेहुँ संकट परइ कि सोई।।
स्रोत अभिलेख 3.28 · पुस्तक पृ. 656, 658
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुम शीघ्र जाओ, तुम्हारे भाई बड़े संकटमें हैं। लक्ष्मणजीने हँसकर कहा—हे माता! सुनो, जिनके भु्रकुटिविलास (भौंके इशारे) मात्रसे सारी सृष्टिका लय (प्रलय) हो जाता है, वे श्रीरामजी क्या कभी स्वप्रमें भी संकटमें पड़ सकते हैं?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 657 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जाहु बेगि संकट अति भ्राता। लछिमन बिहसि कहा सुनु माता।।
English explanation
‘Go quickly; your brother is in grave danger.’ Lakshmana smiled and said, ‘Listen, Mother.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाहु | जाओ | go |
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| संकट | संकट में | in danger |
| अति | अत्यधिक | grave; extreme |
| भ्राता | तुम्हारे भाई राम | your brother Rama |
| लछिमन | लक्ष्मण ने | Lakshmana |
| बिहसि | मुसकराकर | smiling |
| कहा | कहा | said |
| सुनु | सुनिए | listen |
| माता | हे माता सीता | Mother Sita |
2 भृकुटि बिलास सृष्टि लय होई। सपनेहुँ संकट परइ कि सोई।।
English explanation
Can he whose mere movement of the brows dissolves creation fall into danger even in a dream?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भृकुटि | भौंहों का | of the brows |
| बिलास | सहज संकेत या हिलना | effortless movement or gesture |
| सृष्टि | सृष्टि का | of creation |
| लय | विलय; संहार | dissolution |
| होई | हो जाता है | takes place |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in a dream |
| संकट | संकट में | into danger |
| परइ | पड़ते हैं | fall |
| कि | क्या | could; question marker |
| सोई | वे ही राम | that very Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 657
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना · श्रीसीताहरण और श्रीसीता-विलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 656, 658
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।