अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
खल बधि तुरत फिरे रघुबीरा। सोह चाप कर कटि तूनीरा।।
मूल पाठ
खल बधि तुरत फिरे रघुबीरा। सोह चाप कर कटि तूनीरा।।
आरत गिरा सुनी जब सीता। कह लछिमन सन परम सभीता।।
स्रोत अभिलेख 3.28 · पुस्तक पृ. 656, 658
भावार्थ
मूल पाठ के बाददुष्ट मारीचको मारकर श्रीरघुवीर तुरंत लौट पड़े। हाथमें धनुष और कमरमें तरकस शोभा दे रहा है। इधर जब सीताजीने दु:खभरी वाणी (मरते समय मारीचकी 'हा लक्ष्मण की आवाज) सुनी तो वे बहुत ही भयभीत होकर लक्ष्मणजीसे कहने लगीं—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 656 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 खल बधि तुरत फिरे रघुबीरा। सोह चाप कर कटि तूनीरा।।
English explanation
AI draft: Having slain the villain, Rama returned immediately. A bow graced his hand and a quiver his waist.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खल | दुष्ट राक्षस को | the villainous demon |
| बधि | मारकर | having slain |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| फिरे | लौटे | returned |
| रघुबीरा | रघुवंश के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| सोह | शोभित है | is resplendent |
| चाप | धनुष | bow |
| कर | हाथ में | in his hand |
| कटि | कमर पर | at his waist |
| तूनीरा | तरकस | quiver |
2 आरत गिरा सुनी जब सीता। कह लछिमन सन परम सभीता।।
English explanation
When Sita heard the distressed cry, she spoke to Lakshmana in great fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आरत | व्याकुल | distressed |
| गिरा | वाणी; पुकार | voice; cry |
| सुनी | सुनी | heard |
| जब | जब | when |
| सीता | राम की पत्नी सीता ने | Sita, Rama’s wife |
| कह | कहा | said |
| लछिमन | राम के भाई लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| सन | से | to |
| परम | अत्यंत | extremely |
| सभीता | भयभीत | afraid |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 656
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना · श्रीसीताहरण और श्रीसीता-विलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 656, 658
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।