अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भा निरास उपजी मन त्रासा। जथा चक्र भय रिषि दुर्बासा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब वह निराश हो गया, उसके मनमें भय उत्पन्न हो गया; जैसे दुर्वासा ऋषिको चक्रसे भय हुआ था। वह ब्रह्मलोक, शिवलोक आदि समस्त लोकोंमें थका हुआ और भय-शोकसे व्याकुल होकर भागता फिरा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 621 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भा निरास उपजी मन त्रासा। जथा चक्र भय रिषि दुर्बासा।।
ब्रह्मधाम सिवपुर सब लोका। फिरा श्रमित ब्याकुल भय सोका।।
स्रोत अभिलेख 3.2 · पुस्तक पृ. 621, 622
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भा निरास उपजी मन त्रासा। जथा चक्र भय रिषि दुर्बासा।।
English explanation
He became hopeless, and fear arose in his heart, as sage Durvasa had feared the discus.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भा | हो गया | became |
| निरास | निराश | hopeless |
| उपजी | उत्पन्न हुई | arose |
| मन | मन में | in his heart |
| त्रासा | भय की दशा | terror |
| जथा | जैसे | just as |
| चक्र | सुदर्शन चक्र का | of the Sudarshana discus |
| भय | भय | fear |
| रिषि | ऋषि | sage |
| दुर्बासा | दुर्वासा को | to Durvasa |
2 ब्रह्मधाम सिवपुर सब लोका। फिरा श्रमित ब्याकुल भय सोका।।
English explanation
He wandered through Brahma’s abode, Shiva’s realm, and all the worlds, exhausted and distraught with fear and sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्मधाम | ब्रह्मा का धाम | Brahma’s abode |
| सिवपुर | शिव का लोक | Shiva’s realm |
| सब | सभी | all |
| लोका | लोकों में | through the worlds |
| फिरा | घूमता रहा | wandered |
| श्रमित | थका हुआ | exhausted |
| ब्याकुल | व्याकुल | distraught |
| भय | भय से | with fear |
| सोका | शोक से | with sorrow |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 621
- सहायक विषय
- जयन्तकी कुटिलता और फलप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 621, 622
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।