अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
काहूँ बैठन कहा न ओही। राखि को सकइ राम कर द्रोही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[पर रखना तो दूर रहा] किसीने उसे बैठनेतकके लिये नहीं कहा। श्रीरामजीके द्रोहीको कौन रख सकता है? [काकभुशुण्डिजी कहते हैं—] हे गरुड़! सुनिये, उसके लिये माता मृत्युके समान, पिता यमराजके समान और अमृत विषके समान हो जाता है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 621 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
काहूँ बैठन कहा न ओही। राखि को सकइ राम कर द्रोही।।
मातु मृत्यु पितु समन समाना। सुधा होइ बिष सुनु हरिजाना।।
स्रोत अभिलेख 3.2 · पुस्तक पृ. 621, 622
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 काहूँ बैठन कहा न ओही। राखि को सकइ राम कर द्रोही।।
English explanation
No one even invited him to sit. Who can protect one who has acted against Rama?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काहूँ | किसी ने भी | anyone |
| बैठन | बैठने को | to sit |
| कहा | कहा | invited |
| न | नहीं | not |
| ओही | उसे | him |
| राखि | रक्षा करना | protect |
| को | कौन | who |
| सकइ | सकता है | can |
| राम | राम | Rama |
| कर | का | of |
| द्रोही | द्रोह करने वाला | one who acts against him |
2 मातु मृत्यु पितु समन समाना। सुधा होइ बिष सुनु हरिजाना।।
English explanation
Listen, devotee of Hari: for such a person, the mother becomes like death and the father like Yama; even nectar turns to poison.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | माता | mother |
| मृत्यु | मृत्यु के समान | like death |
| पितु | पिता | father |
| समन | यमराज | Yama, lord of death |
| समाना | के समान | like |
| सुधा | अमृत | nectar of immortality |
| होइ | हो जाता है | becomes |
| बिष | विष | poison |
| सुनु | सुनो | listen |
| हरिजाना | हे हरि के भक्त | O devotee of Hari |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 621
- सहायक विषय
- जयन्तकी कुटिलता और फलप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 621, 622
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।