अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रेरित मंत्र ब्रह्मसर धावा। चला भाजि बायस भय पावा।।
मूल पाठ
प्रेरित मंत्र ब्रह्मसर धावा। चला भाजि बायस भय पावा।।
धरि निज रुप गयउ पितु पाहीं। राम बिमुख राखा तेहि नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 3.2 · पुस्तक पृ. 621, 622
भावार्थ
मूल पाठ के बादमन्त्रसे प्रेरित होकर वह ब्रह्मबाण दौड़ा। कौआ भयभीत होकर भाग चला। वह अपना असली रूप धरकर पिता इन्द्रके पास गया, पर श्रीरामजीका विरोधी जानकर इन्द्रने उसको नहीं रखा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 621 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रेरित मंत्र ब्रह्मसर धावा। चला भाजि बायस भय पावा।।
English explanation
The Brahma-arrow, impelled by a mantra, sped forth. The crow fled in fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेरित | प्रेरित किया हुआ | impelled |
| मंत्र | मंत्र द्वारा | by a mantra |
| ब्रह्मसर | ब्रह्मबाण | the Brahma-arrow |
| धावा | दौड़ा | sped forth |
| चला | चल पड़ा | set off |
| भाजि | भागकर | fleeing |
| बायस | कौआ, अर्थात जयंत | the crow, namely Jayanta |
| भय | डर | fear |
| पावा | अनुभव किया | experienced |
2 धरि निज रुप गयउ पितु पाहीं। राम बिमुख राखा तेहि नाहीं।।
English explanation
Assuming his own form, he went to his father. His father did not shelter him, since he had turned against Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरि | धारण करके | assuming |
| निज | अपना | his own |
| रुप | रूप | form |
| गयउ | गया | went |
| पितु | पिता, इंद्र | his father, Indra |
| पाहीं | के पास | to |
| राम | श्रीराम से | from Rama |
| बिमुख | विमुख; विरोध करने वाला | turned away; hostile |
| राखा | आश्रय दिया | gave shelter |
| तेहि | उन्होंने, अर्थात पिता ने | he, the father |
| नाहीं | नहीं | not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 621
- सहायक विषय
- जयन्तकी कुटिलता और फलप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 621, 622
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।