अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भगति जोग सुनि अति सुख पावा। लछिमन प्रभु चरनन्हि सिरु नावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइस भक्तियोगको सुनकर लक्ष्मणजीने अत्यन्त सुख पाया और उन्होंने प्रभु श्रीरामचन्द्रजीके चरणोंमें सिर नवाया। इस प्रकार वैराग्य, ज्ञान, गुण और नीति कहते हुए कुछ दिन बीत गये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 641 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भगति जोग सुनि अति सुख पावा। लछिमन प्रभु चरनन्हि सिरु नावा।।
एहि बिधि गए कछुक दिन बीती। कहत बिराग ग्यान गुन नीती।।
स्रोत अभिलेख 3.17 · पुस्तक पृ. 641, 643
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भगति जोग सुनि अति सुख पावा। लछिमन प्रभु चरनन्हि सिरु नावा।।
English explanation
AI-generated draft: Hearing the teaching on the path of devotion, Lakshmana felt great joy and bowed his head at the Lord’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगति | भक्ति | devotion |
| जोग | साधना का मार्ग | spiritual discipline or path |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| अति | बहुत | great |
| सुख | आनंद | joy |
| पावा | पाया | experienced |
| लछिमन | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| चरनन्हि | चरणों में | at the feet |
| सिरु | सिर | head |
| नावा | झुकाया | bowed |
2 एहि बिधि गए कछुक दिन बीती। कहत बिराग ग्यान गुन नीती।।
English explanation
In this way, some days passed in discussing detachment, knowledge, virtues, and right conduct.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| गए | गुज़र गए | passed |
| कछुक | कुछ | a few |
| दिन | दिन | days |
| बीती | बीतकर | elapsing |
| कहत | कहते हुए | while discussing |
| बिराग | वैराग्य | detachment |
| ग्यान | ज्ञान | spiritual knowledge |
| गुन | गुण | virtues |
| नीती | नीति, उचित आचरण | ethics and right conduct |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 641
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 641, 643
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।